Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.215.29: उस समय इस अक्षम्य पाप के कारण मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हुई। वह घोर तपस्वी ब्राह्मण भूमि पर पड़ा कराह रहा था। | mahabharat अध्याय 3.215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकार्यकरणाच्चापि भृशं मे व्यथितं मन:।
तमुग्रतपसं विप्रं निष्टनन्तं महीतले॥ २९॥
अनुवाद
उस समय इस अक्षम्य पाप के कारण मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हुई। वह घोर तपस्वी ब्राह्मण भूमि पर पड़ा कराह रहा था।
I felt great pain in my heart at that time for having committed this unpardonable sin. That fierce ascetic Brahmin was lying on the ground and groaning.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥