Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.215.19: आश्चर्य की बात है कि यह सनातन धर्म, जिसका स्वरूप समझना अत्यंत कठिन है, शूद्र कुल में जन्म लेने वाले व्यक्ति में भी विद्यमान है। मैं तुम्हें शूद्र नहीं मानता। तुम्हारे शूद्र कुल में जन्म लेने का अवश्य ही कोई विशेष कारण होगा॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्ज्ञेय: शाश्वतो धर्म: शूद्रयोनौ हि वर्तते।
न त्वां शूद्रमहं मन्ये भवितव्यं हि कारणम्॥ १९॥
अनुवाद
आश्चर्य की बात है कि यह सनातन धर्म, जिसका स्वरूप समझना अत्यंत कठिन है, शूद्र कुल में जन्म लेने वाले व्यक्ति में भी विद्यमान है। मैं तुम्हें शूद्र नहीं मानता। तुम्हारे शूद्र कुल में जन्म लेने का अवश्य ही कोई विशेष कारण होगा॥19॥
It is amazing that this Sanatan Dharma, whose nature is very difficult to understand, exists even in a person born in a Shudra. I do not consider you a Shudra. There must be some special reason for your birth in a Shudra.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥