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mahabharat 3.215.17: राजा ययाति स्वर्ग से गिर गए थे; किन्तु उनके सद्गुणी दौहित्रों (पुत्री के पुत्रों) ने उन्हें पुनः बचा लिया - वे पहले की भाँति स्वर्ग में स्थित हो गए। पुरुषसिंह! उसी प्रकार आज आपने मुझ ब्राह्मण को भी नरक में गिरने से बचा लिया है। 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.215.17 
राजा ययातिर्दौहित्रै: पतितस्तारितो यथा।
सद्भि: पुरुषशार्दूल तथाहं भवता द्विज:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा ययाति स्वर्ग से गिर गए थे; किन्तु उनके सद्गुणी दौहित्रों (पुत्री के पुत्रों) ने उन्हें पुनः बचा लिया - वे पहले की भाँति स्वर्ग में स्थित हो गए। पुरुषसिंह! उसी प्रकार आज आपने मुझ ब्राह्मण को भी नरक में गिरने से बचा लिया है। 17॥
 
King Yayati had fallen from heaven; But his good natured Dauhitaras (daughter's sons) again saved him - he became established in heaven as before. Purusha Singh! Similarly, today you have also saved me, a Brahmin, from falling into hell. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)