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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन
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श्लोक 4
श्लोक
3.214.4
उत्तिष्ठ भगवन् क्षिप्रं प्रविश्याभ्यन्तरं गृहम्।
द्रष्टुमर्हसि धर्मज्ञ मातरं पितरं च मे॥ ४॥
अनुवाद
हे प्रभु! आप धर्म के ज्ञाता हैं, कृपया उठें और शीघ्र ही घर के अन्दर जाकर मेरे माता-पिता को देखें॥4॥
O Lord! You are the knower of Dharma, please get up and quickly go inside the house and see my parents. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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