श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.214.24 
स्वयं च स्नापयाम्येतौ तथा पादौ प्रधावये।
आहारं च प्रयच्छामि स्वयं च द्विजसत्तम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं स्वयं ही उन्हें स्नान कराता हूँ, उनके चरण धोता हूँ और स्वयं ही उन्हें भोजन कराता हूँ॥24॥
 
O best of Brahmins! I myself bathe them, wash their feet and feed them myself. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)