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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन
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श्लोक 2
श्लोक
3.214.2
न्याययुक्तमिदं सर्वं भवता परिकीर्तितम्।
न तेऽस्त्यविदितं किंचिद् धर्मेष्विह हि दृश्यते॥ २॥
अनुवाद
‘पिताजी! आपने जो कुछ मुझसे कहा है, वह ठीक है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि धर्म के विषय में यहाँ ऐसी कोई बात नहीं है जो आप न जानते हों।’॥2॥
‘Father! Whatever you have told me is all right. It seems to me that there is nothing here about religion that you do not know.'॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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