vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन
»
श्लोक 2
श्लोक
3.214.2
न्याययुक्तमिदं सर्वं भवता परिकीर्तितम्।
न तेऽस्त्यविदितं किंचिद् धर्मेष्विह हि दृश्यते॥ २॥
अनुवाद
‘पिताजी! आपने जो कुछ मुझसे कहा है, वह ठीक है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि धर्म के विषय में यहाँ ऐसी कोई बात नहीं है जो आप न जानते हों।’॥2॥
‘Father! Whatever you have told me is all right. It seems to me that there is nothing here about religion that you do not know.'॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×