श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.214.19 
त्रयस्त्रिंशद् यथा देवा: सर्वे शक्रपुरोगमा:।
सम्पूज्या: सर्वलोकस्य तथा वृद्धाविमौ मम॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्रसहित तैंतीस देवता सम्पूर्ण जगत् के लिए पूजनीय हैं, वैसे ही ये दोनों वृद्ध माता-पिता मेरे लिए पूजनीय हैं॥19॥
 
Just as the thirty-three gods including Indra are worthy of worship for the entire world, similarly, these two old parents are worthy of worship for me.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)