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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन
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श्लोक 18
श्लोक
3.214.18
व्याध उवाच
पिता माता च भगवन्नेतौ मद्दैवतं परम्।
यद् दैवतेभ्य: कर्तव्यं तदेताभ्यां करोम्यहम्॥ १८॥
अनुवाद
धर्मव्याध बोले - भगवन् ! ये माता-पिता मेरे प्रधान देवता हैं। जो कुछ देवताओं के लिए करना चाहिए, वही मैं इन दोनों के लिए करता हूँ ॥18॥
Dharamvyadh said – God! These parents are my main deities. Whatever should be done for the gods, I do for these two. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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