श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.214.16 
वृद्धावूचतु:
कुशलं नौ गृहे विप्र भृत्यवर्गे च सर्वश:।
कच्चित् त्वमप्यविघ्नेन सम्प्राप्तो भगवन्निति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उन वृद्धों ने उत्तर दिया - ब्रह्मन्! हम दोनों इस घर में सुरक्षित हैं। हमारे सेवक और परिवारजन भी कुशलपूर्वक हैं। प्रभु! अपना समाचार बताइए, क्या आप यहाँ सकुशल पहुँच गए? क्या आपको कोई कष्ट या बाधा आई?॥16॥
 
Those old men replied - Brahman! We both are safe in this house. Our servants and family members are also well. Lord! Tell us your news, did you reach here safely? Did you face any trouble or obstacle?॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)