श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 214: माता-पिताकी सेवाका दिग्दर्शन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.214.14 
ततस्तं ब्राह्मणं ताभ्यां धर्मव्याधो न्यवेदयत्।
तौ स्वागतेन तं विप्रमर्चयामासतुस्तदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मव्याध ने उस कौशिक ब्राह्मण का परिचय अपने माता-पिता से कराया। फिर उन दोनों ने भी ब्राह्मण का स्वागत और पूजन किया॥14॥
 
Thereafter Dharmavyadh introduced that Kaushik Brahmin to his parents. Then both of them also welcomed and worshipped the Brahmin.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)