Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.213.6: इस प्रकार प्राण इस जगत में सर्वत्र विद्यमान है। प्राण से ही सब कुछ संचालित है। बाद में जब वही प्राण समान वायु की अवस्था को प्राप्त होता है, तब वह अपनी पृथक गति का आश्रय लेता है। 6. | mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं त्विह स सर्वत्र प्राणेन परिपाल्यते।
पृष्ठतस्तु समानेन स्वां स्वां गतिमुपाश्रित:॥ ६॥
अनुवाद
इस प्रकार प्राण इस जगत में सर्वत्र विद्यमान है। प्राण से ही सब कुछ संचालित है। बाद में जब वही प्राण समान वायु की अवस्था को प्राप्त होता है, तब वह अपनी पृथक गति का आश्रय लेता है। 6.
In this way, Prana is present everywhere in this world. Everything is sustained by Prana. Later, when the same Prana gets the state of Samana Vayu, then it takes shelter of its own separate movement. 6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥