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mahabharat 3.213.40: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैंने जो कुछ सुना है, वह सब संक्षेप में तुमसे कह दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥40॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.213.40 
यथाश्रुतमिदं सर्वं समासेन द्विजोत्तम।
एतत् ते सर्वमाख्यातं किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैंने जो कुछ सुना है, वह सब संक्षेप में तुमसे कह दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥40॥
 
O great Brahmin! I have told you everything in brief, as I have heard it. What else do you wish to hear?॥ 40॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि ब्राह्मणव्याधसंवादे त्रयोदशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें ब्राह्मणव्याधसंवादविषयक

दो सौ तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१३॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४३ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)