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mahabharat 3.213.4: भूत, वर्तमान और भविष्य - सब कुछ प्राण पर ही निर्भर है, वह प्राण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ है। 1 इसलिए हम सब लोग परब्रह्म से उत्पन्न प्राण की पूजा करते हैं। 2॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.213.4 
भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं प्राणे प्रतिष्ठितम्।
श्रेष्ठं तदेव भूतानां ब्रह्मयोनिमुपास्महे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भूत, वर्तमान और भविष्य - सब कुछ प्राण पर ही निर्भर है, वह प्राण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ है। 1 इसलिए हम सब लोग परब्रह्म से उत्पन्न प्राण की पूजा करते हैं। 2॥4॥
 
Past, present and future—everything is dependent on Prana, that Prana is the best among all beings. 1 Therefore, we all worship Prana which is born from the Supreme Brahman. 2 ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)