श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.213.34 
न हिंस्यात् सर्वभूतानि मैत्रायणगतश्चरेत्।
नेदं जीवितमासाद्य वैरं कुर्वीत केनचित्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
किसी भी प्राणी को कष्ट न दो। सबके प्रति मैत्रीभाव रखो। इस दुर्लभ मानव जीवन को पाकर किसी से भी बैर न रखो। ॥34॥
 
Do not harm any living creature. Be friendly towards all. Having got this rare human life, do not bear enmity towards anyone. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)