Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.213.25: जैसे भोजन आदि से तृप्त हुआ मनुष्य सुखपूर्वक सोता है और जैसे चतुर व्यक्ति द्वारा वायुरहित स्थान में जलाया हुआ दीपक स्थिर होकर प्रकाशित होता है, वैसे ही मन की पवित्रता का लक्षण है ॥25॥ | mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे भोजन आदि से तृप्त हुआ मनुष्य सुखपूर्वक सोता है और जैसे चतुर व्यक्ति द्वारा वायुरहित स्थान में जलाया हुआ दीपक स्थिर होकर प्रकाशित होता है, वैसे ही मन की पवित्रता का लक्षण है ॥25॥
Just as a man satiated with food etc. sleeps comfortably and just as a lamp lit by a clever person in a windless place shines steadily, so is the characteristic of purity of the mind. ॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥