Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.213.20: जैसे कमल के पत्ते पर पड़ी हुई जल की बूँद अनासक्त रहती है, वैसे ही आत्मदेव (आत्मा) इस स्थूल शरीर में अनासक्त भाव से निवास करते हैं। वे क्षेत्रज्ञ हैं, उन्हें तुम जानो। उन्होंने योग के द्वारा अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है और वे सनातन हैं ॥20॥ | mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे कमल के पत्ते पर पड़ी हुई जल की बूँद अनासक्त रहती है, वैसे ही आत्मदेव (आत्मा) इस स्थूल शरीर में अनासक्त भाव से निवास करते हैं। वे क्षेत्रज्ञ हैं, उन्हें तुम जानो। उन्होंने योग के द्वारा अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है और वे सनातन हैं ॥20॥
Just as a drop of water lying on a lotus leaf remains unattached, similarly the Atmadev (soul) resides in the physical body without attachment. He is the knower of the field, you must know him. He has gained control over his mind and intellect through yoga and he is eternal. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥