Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.213.19: जैसे अग्नि को अग्निकुण्ड में रखा जाता है, वैसे ही ज्योतिस्वरूप आत्मा ऊपर वर्णित कलासमूह रूपी शरीर में सदैव विद्यमान रहता है। उसे तुम जानो। वही मन और बुद्धि को प्रतिदिन अपने वश में रखने वाला तथा योगबल से धारण करने वाला है। 19॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.213.19 
तस्मिन् य: संस्थितो ह्यग्निर्नित्यं स्थाल्यामिवाहित:।
आत्मानं तं विजानीहि नित्यं योगजितात्मकम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि को अग्निकुण्ड में रखा जाता है, वैसे ही ज्योतिस्वरूप आत्मा ऊपर वर्णित कलासमूह रूपी शरीर में सदैव विद्यमान रहता है। उसे तुम जानो। वही मन और बुद्धि को प्रतिदिन अपने वश में रखने वाला तथा योगबल से धारण करने वाला है। 19॥
 
Just like a fire is kept in a firebox, similarly the soul in the form of light is always present in the body in the form of art group mentioned above. You know him. He is the one who keeps the mind and intellect under his control daily and with the power of yoga. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)