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mahabharat 3.213.12: समान और उदान वायु के बीच प्राण और अपान वायु स्थित हैं। इनके संघर्ष से उत्पन्न जठराग्नि अन्न को पचाती है और उसके रस से शरीर का भली-भाँति पोषण करती है।*॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.213.12 
समानोदानयोर्मध्ये प्राणापानौ समाहितौ।
समर्थितस्त्वधिष्ठानं सम्यक् पचति पावक:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
समान और उदान वायु के बीच प्राण और अपान वायु स्थित हैं। इनके संघर्ष से उत्पन्न जठराग्नि अन्न को पचाती है और उसके रस से शरीर का भली-भाँति पोषण करती है।*॥12॥
 
Between the samana and udana vayus lie the prana and apana vayus. The gastric fire produced by their conflict digests the food and nourishes the body well with its juice*॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)