Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.213.1: ब्राह्मण ने पूछा - व्याध! शरीर में स्थित अग्निरूपी प्राण पार्थिव धातु का आश्रय लेकर किस प्रकार जीवित रहता है? तथा प्राणवायु (रस-रक्त-दिका) नाड़ियों के विशिष्ट मार्गों से किस प्रकार संचालित होती है? 1॥ | mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
पार्थिवं धातुमासाद्य शारीरोऽग्नि: कथं भवेत्।
अवकाशविशेषेण कथं वर्तयतेऽनिल:॥ १॥
अनुवाद
ब्राह्मण ने पूछा - व्याध! शरीर में स्थित अग्निरूपी प्राण पार्थिव धातु का आश्रय लेकर किस प्रकार जीवित रहता है? तथा प्राणवायु (रस-रक्त-दिका) नाड़ियों के विशिष्ट मार्गों से किस प्रकार संचालित होती है? 1॥
The Brahmin asked – Huntsman! How does the fire-like prana residing in the body survive by relying on the earthly metal? And how does the vital air (Rasa-Rakta-dika) operate through the specific pathways of the nerves? 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥