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mahabharat 3.211.6: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! शब्द, स्पर्श, रूप और रस ये जल के चार गुण हैं। हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले ब्राह्मण! ये पहले भी तुमसे कहे जा चुके हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.211.6 
शब्द: स्पर्शश्च रूपं च रसश्चापि द्विजोत्तम।
अपामेते गुणा ब्रह्मन् कीर्तितास्तव सुव्रत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! शब्द, स्पर्श, रूप और रस ये जल के चार गुण हैं। हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले ब्राह्मण! ये पहले भी तुमसे कहे जा चुके हैं।
 
O best of the Brahmins! Sound, touch, form and taste are the four qualities of water. O Brahmin who observes the best vows! These have been described to you earlier also. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)