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mahabharat 3.211.27: शब्द आदि छहों इन्द्रियों के विषयों से प्राप्त होने वाले सुख के लाभ के विषय में सभी मनुष्य मोह और संशय में पड़ जाते हैं। परंतु जो तपस्वी है, जो इनके दोषों का अनुसंधान करता है, वह इन्हें वश में करके ध्यान के आनन्द का अनुभव करता है। 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.211.27 
येषु विप्रतिपद्यन्ते षट्सु मोहात् फलागमम्।
तेष्वध्यवसिताध्यायी विन्दते ध्यानजं फलम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
शब्द आदि छहों इन्द्रियों के विषयों से प्राप्त होने वाले सुख के लाभ के विषय में सभी मनुष्य मोह और संशय में पड़ जाते हैं। परंतु जो तपस्वी है, जो इनके दोषों का अनुसंधान करता है, वह इन्हें वश में करके ध्यान के आनन्द का अनुभव करता है। 27॥
 
All human beings fall into delusion and doubt regarding the benefits of happiness derived from the subjects of these six senses like words etc. But the one who is an ascetic, who investigates their faults, experiences the joy of meditation by controlling them. 27॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि ब्राह्मणव्याधसंवादे एकादशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें ब्राह्मण-व्याध-संवादविषयक दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)