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mahabharat 3.211.26: जैसे जल पर चलती हुई नाव वायु के द्वारा बहा ले जाती है, वैसे ही संसार के भोगों में विचरण करने वाली समस्त इन्द्रियों में से मन ही वह इन्द्रिय है, जो अज्ञानी मनुष्य की बुद्धि को बहा ले जाती है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.211.26 
इन्द्रियाणां विचरतां यन्मनोऽनु विधीयते।
तदस्य हरते बुद्धिं नावं वायुरिवाम्भसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जैसे जल पर चलती हुई नाव वायु के द्वारा बहा ले जाती है, वैसे ही संसार के भोगों में विचरण करने वाली समस्त इन्द्रियों में से मन ही वह इन्द्रिय है, जो अज्ञानी मनुष्य की बुद्धि को बहा ले जाती है॥ 26॥
 
Just as a boat sailing on water is swept away by the wind, so too, out of all the senses wandering in worldly pleasures, the one sense with which the mind remains, sweeps away the intellect of the unwise man.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)