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mahabharat 3.211.25: मार्ग में दौड़ते घोड़ों के समान विषयों में विचरण करने वाली इन इन्द्रियों को धैर्यपूर्वक वश में करो। जो धैर्यपूर्वक काम करता है, वह निश्चय ही इन पर विजय प्राप्त करता है। 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.211.25 
इन्द्रियाणां प्रसृष्टानां हयानामिव वर्त्मसु।
धृतिं कुर्वीत सारथ्ये धृत्या तानि जयेद् ध्रुवम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में दौड़ते घोड़ों के समान विषयों में विचरण करने वाली इन इन्द्रियों को धैर्यपूर्वक वश में करो। जो धैर्यपूर्वक काम करता है, वह निश्चय ही इन पर विजय प्राप्त करता है। 25॥
 
Try patiently to control these senses which wander about the objects like horses running on the road. The one who works patiently definitely wins over them. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)