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mahabharat 3.211.23: मनुष्य का प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला स्थूल शरीर ही रथ है। आत्मा (बुद्धि) सारथी है और इन्द्रियाँ घोड़े कही गई हैं। जिस प्रकार कुशल, सावधान और धैर्यवान सारथी श्रेष्ठ घोड़ों को नियंत्रित करके उनके साथ सुखपूर्वक यात्रा करता है, उसी प्रकार सावधान, धैर्यवान और साधन संपन्न मनुष्य इन्द्रियों को नियंत्रित करके अपने जीवन की यात्रा सुखपूर्वक पूरी करता है।॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.211.23 
रथ: शरीरं पुरुषस्य दृष्ट-
मात्मा नियन्तेन्द्रियाण्याहुरश्वान्।
तैरप्रमत्त: कुशली सदश्वै-
र्दान्तै: सुखं याति रथीव धीर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य का प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला स्थूल शरीर ही रथ है। आत्मा (बुद्धि) सारथी है और इन्द्रियाँ घोड़े कही गई हैं। जिस प्रकार कुशल, सावधान और धैर्यवान सारथी श्रेष्ठ घोड़ों को नियंत्रित करके उनके साथ सुखपूर्वक यात्रा करता है, उसी प्रकार सावधान, धैर्यवान और साधन संपन्न मनुष्य इन्द्रियों को नियंत्रित करके अपने जीवन की यात्रा सुखपूर्वक पूरी करता है।॥ 23॥
 
The physical body of a man which is directly visible is a chariot. The soul (intellect) is the charioteer and the senses are described as horses. Just as a skilful, careful and patient charioteer controls the best horses and travels comfortably with them, similarly a careful, patient and resourceful man controls the senses and completes his life's journey comfortably.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)