श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.211.21 
इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोषमार्च्छन्त्यसंशयम्।
संनियम्य तु तान्येव तत: सिद्धिं समाप्नुयात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों के सम्पर्क से ही मनुष्य निस्संदेह दुर्गुण, दुर्गुण आदि प्राप्त करते हैं। उन इन्द्रियों को भलीभाँति वश में करके वे पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हैं ॥21॥
 
It is through contact with the senses that humans undoubtedly acquire vices, vices etc. By controlling those senses well, they can attain complete success. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)