Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.211.18: हे ब्राह्मण! तुम मुझसे जो कुछ पूछ रहे हो, उसके उत्तर में मैं तुमसे कहता हूँ कि इन सबका मूल तप है। वह तप इन्द्रियों को वश में करने से ही सिद्ध होता है, अन्य किसी उपाय से नहीं॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.211: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका और इन्द्रियनिग्रहका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! तुम मुझसे जो कुछ पूछ रहे हो, उसके उत्तर में मैं तुमसे कहता हूँ कि इन सबका मूल तप है। वह तप इन्द्रियों को वश में करने से ही सिद्ध होता है, अन्य किसी उपाय से नहीं॥18॥
O Brahmin! In answer to whatever you are asking me, I am telling you that the root of all this is austerity. That austerity is accomplished only by controlling the senses, and not by any other means.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥