Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.210.7-8h: हे ब्राह्मण! जब उसके हितैषी मित्र और विद्वान् लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं, तब वह इसके समर्थन में शास्त्रविरुद्ध उत्तर देता है, फिर भी कहता है कि यह वेदों द्वारा प्रतिपादित है। | mahabharat अध्याय 3.210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! जब उसके हितैषी मित्र और विद्वान् लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं, तब वह इसके समर्थन में शास्त्रविरुद्ध उत्तर देता है, फिर भी कहता है कि यह वेदों द्वारा प्रतिपादित है।
O Brahmin! When his well-wishing friends and learned men stop him from doing so, then he gives unscriptural answers in support of it, but still says that it is propounded by the Vedas. 7 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥