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mahabharat 3.210.17: आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ये पाँच महाभूत हैं और शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध क्रमशः इनके विशेष गुण हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.210.17 
महाभूतानि खं वायुरग्निरापस्तथा च भू:।
शब्द: स्पर्शश्च रूपं च रसो गन्धश्च तद्‍गुणा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ये पाँच महाभूत हैं और शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध क्रमशः इनके विशेष गुण हैं ॥17॥
 
Sky, air, fire, water and earth are the five great elements, and sound, touch, form, taste and smell are their special qualities respectively. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)