श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.210.16 
इदं विश्वं जगत् सर्वमजय्यं चापि सर्वश:।
महाभूतात्मकं ब्रह्म नात: परतरं भवेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पंचमहाभूतों से निर्मित यह सम्पूर्ण चराचर जगत ब्रह्मस्वरूप है, सब प्रकार से अजेय है। ब्रह्म से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। 16॥
 
This entire living world made up of the five great elements is the form of Brahma, invincible in every way. There is nothing better than Brahma. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)