vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन
»
श्लोक 16
श्लोक
3.210.16
इदं विश्वं जगत् सर्वमजय्यं चापि सर्वश:।
महाभूतात्मकं ब्रह्म नात: परतरं भवेत्॥ १६॥
अनुवाद
पंचमहाभूतों से निर्मित यह सम्पूर्ण चराचर जगत ब्रह्मस्वरूप है, सब प्रकार से अजेय है। ब्रह्म से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। 16॥
This entire living world made up of the five great elements is the form of Brahma, invincible in every way. There is nothing better than Brahma. 16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd