Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.210.10: वह अपने समान स्वभाव वाले पापी मनुष्यों से मित्रता करता है। उस पाप के कारण उसे इस लोक में तो दुःख भोगना ही पड़ता है, परलोक में भी उसे महान् कष्ट भोगने पड़ते हैं॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 3.210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकशीलैश्च मित्रत्वं भजन्ते पापकर्मिण:।
स तेन दु:खमाप्नोति परत्र च विपद्यते॥ १०॥
अनुवाद
वह अपने समान स्वभाव वाले पापी मनुष्यों से मित्रता करता है। उस पाप के कारण उसे इस लोक में तो दुःख भोगना ही पड़ता है, परलोक में भी उसे महान् कष्ट भोगने पड़ते हैं॥ 10॥
He makes friends with sinful people who have a similar nature to him. Due to that sin, he not only suffers in this world, but also has to face great troubles in the next world.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥