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mahabharat 3.21.28: वीर महाबाहो! जब वह गिर रहा था, तब शत्रु सैनिक हाथों में भाले और बेल्ट लेकर उस पर बार-बार प्रहार कर रहे थे। उनके इस क्रूर कृत्य से मेरा हृदय काँप उठा। 28.   |   mahabharat अध्याय 3.21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.21.28 
तं पतन्तं महाबाहो शूलपट्टिशपाणय:।
अभिघ्नन्तो भृशं वीर मम चेतो ह्यकम्पयन्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वीर महाबाहो! जब वह गिर रहा था, तब शत्रु सैनिक हाथों में भाले और बेल्ट लेकर उस पर बार-बार प्रहार कर रहे थे। उनके इस क्रूर कृत्य से मेरा हृदय काँप उठा। 28.
 
Brave Mahabaho! While he was falling, the enemy soldiers were repeatedly attacking him with spears and belts in their hands. This cruel act of theirs made my heart tremble. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)