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mahabharat 3.21.25: उसे ऐसी अवस्था में देखकर समस्त धनुषों में श्रेष्ठ शार्ङ्ग धनुष मेरे हाथ से गिर पड़ा और मैं शाल्व की माया से मोहित होकर चुपचाप रथ के पिछले भाग में बैठ गया॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.21.25 
तत: शार्ङ्गं धनु:श्रेष्ठं करात् प्रपतितं मम।
मोहापन्नश्च कौन्तेय रथोपस्थ उपाविशम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसे ऐसी अवस्था में देखकर समस्त धनुषों में श्रेष्ठ शार्ङ्ग धनुष मेरे हाथ से गिर पड़ा और मैं शाल्व की माया से मोहित होकर चुपचाप रथ के पिछले भाग में बैठ गया॥ 25॥
 
Seeing him in such a state, the best of all bows, Sharanga, fell from my hand and I, enchanted by Shalva's illusion, quietly sat down in the rear part of the chariot.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)