श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.21.22 
ततोऽपश्यं महाराज प्रपतन्तमहं तदा।
सौभाच्छूरसुतं वीर ततो मां मोह आविशत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वीर महाराज! इसी समय मैंने अपने पिता वसुदेवजी को सौभ विमान से नीचे गिरते देखा। इससे शाल्व की माया से मैं मूर्छित हो गया।
 
Brave Maharaj! At this very moment I saw my father Vasudevji falling down from the Saubha Vimana. Due to this, I fainted due to the illusion of Shalva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)