Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.21.15: दूत के ये शब्द सुनकर मेरा हृदय दुःखी हो गया। मैं यह निर्णय करने में असमर्थ था कि क्या उचित है और क्या अनुचित। 15.   |   mahabharat अध्याय 3.21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.21.15 
इत्यहं तस्य वचनं श्रुत्वा परमदुर्मना:।
निश्चयं नाधिगच्छामि कर्तव्यस्येतरस्य च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
दूत के ये शब्द सुनकर मेरा हृदय दुःखी हो गया। मैं यह निर्णय करने में असमर्थ था कि क्या उचित है और क्या अनुचित। 15.
 
Hearing these words of the messenger my heart became sad. I was unable to decide what was right and what was wrong. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)