Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.21.14: जनार्दन! अब युद्ध करके तुम्हें क्या चाहिए? लौट आओ। केवल द्वारका की रक्षा करो। यही तुम्हारा सबसे बड़ा कार्य है।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.21.14 
तदलं साधु युद्धेन निवर्तस्व जनार्दन।
द्वारकामेव रक्षस्व कार्यमेतन्महत् तव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! अब युद्ध करके तुम्हें क्या चाहिए? लौट आओ। केवल द्वारका की रक्षा करो। यही तुम्हारा सबसे बड़ा कार्य है।॥14॥
 
‘Janardan! What do you want from fighting now? Come back. Just protect Dwarka. This is the greatest task for you.’॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)