श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.21.13 
उपायायाद्य शाल्वेन द्वारकां वृष्णिनन्दन।
विषक्ते त्वयि दुर्धर्ष हत: शूरसुतो बलात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'दुर्दर्श वृष्णिनन्दन! आपके युद्ध में मग्न होकर शाल्व ने अभी-अभी द्वारिकापुरी में आकर शूरानन्दन वसुदेवजी को बलपूर्वक मार डाला है। 13॥
 
‘Durdarsha Vrishninandan! Being engrossed in your war, Shalva has just come to Dwarkapuri and forcefully killed Shuranandan Vasudevji. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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