Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.21.12: (दूत ने कहा—) 'वीर! द्वारकानरेश उग्रसेन ने तुम्हें यह संदेश दिया है। केशव! वे तुम्हारे पिता के मित्र हैं; उन्होंने तुम्हें यहाँ आकर इसका पता लगाने को कहा है।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.21.12 
द्वारकाधिपतिर्वीर आह त्वामाहुको वच:।
केशवैहि विजानीष्व यत् त्वां पितृसखोऽब्रवीत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(दूत ने कहा—) 'वीर! द्वारकानरेश उग्रसेन ने तुम्हें यह संदेश दिया है। केशव! वे तुम्हारे पिता के मित्र हैं; उन्होंने तुम्हें यहाँ आकर इसका पता लगाने को कहा है।॥12॥
 
(The messenger said—) 'Valiant! Dwarkanaresh Ugrasen has given you this message. Keshav! He is your father's friend; he has asked you to come here and find out.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)