श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णका शाल्वकी मायासे मोहित होकर पुन: सजग होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.21.1 
वासुदेव उवाच
एवं स पुरुषव्याघ्र शाल्वराजो महारिपु:।
युध्यमानो मया संख्ये वियदभ्यगमत् पुन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं - पुरुषसिंह! इस प्रकार मुझसे युद्ध करने वाला महाशत्रु शाल्वराज पुनः आकाश में चला गया॥1॥
 
Lord Shri Krishna says – Purushasimha! In this way, the great enemy Shalvaraj, who was fighting with me, again went into the sky. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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