श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.209.6 
विषमां च दशां प्राप्तो देवान् गर्हति वै भृशम्।
आत्मन: कर्मदोषाणि न विजानात्यपण्डित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब मूर्ख मनुष्य अपने को किसी कठिन परिस्थिति में पाता है, तब वह देवताओं को कोसता है और उनकी जी भरकर निन्दा करता है; परन्तु वह यह नहीं समझता कि यह उसके अपने ही बुरे कर्मों का फल है ॥6॥
 
When a foolish person finds himself in a difficult situation, he curses the gods and criticizes them to his heart's content; but he does not understand that this is the result of his own bad deeds. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)