विषमां च दशां प्राप्तो देवान् गर्हति वै भृशम्।
आत्मन: कर्मदोषाणि न विजानात्यपण्डित:॥ ६॥
अनुवाद
जब मूर्ख मनुष्य अपने को किसी कठिन परिस्थिति में पाता है, तब वह देवताओं को कोसता है और उनकी जी भरकर निन्दा करता है; परन्तु वह यह नहीं समझता कि यह उसके अपने ही बुरे कर्मों का फल है ॥6॥
When a foolish person finds himself in a difficult situation, he curses the gods and criticizes them to his heart's content; but he does not understand that this is the result of his own bad deeds. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)