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श्लोक  3.209.54 
इन्द्रियाणां निरोधेन सत्येन च दमेन च।
ब्रह्मण: पदमाप्नोति यत् परं द्विजसत्तम॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! इन्द्रियों का संयम, सत्य बोलना और मन का संयम - इनसे मनुष्य ब्रह्म की परम गति को प्राप्त होता है।
 
Dwijshreshtha! Restraint on senses, speaking truth and control of mind – through these a person attains the supreme state of Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)