Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.209.51-52h: वह सम्पूर्ण जगत् को नाशवान जानकर, उसे त्यागने का प्रयत्न करता है। तत्पश्चात्, वह उचित साधनों द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रयत्न करता है। वह अनुपय (भाग्य आदि) का आश्रय लेकर निष्क्रिय नहीं बैठता। ॥51 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह सम्पूर्ण जगत् को नाशवान जानकर, उसे त्यागने का प्रयत्न करता है। तत्पश्चात्, वह उचित साधनों द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रयत्न करता है। वह अनुपय (भाग्य आदि) का आश्रय लेकर निष्क्रिय नहीं बैठता। ॥51 1/2॥
Knowing the entire world to be mortal, he tries to abandon it all. Thereafter, he tries to attain salvation by appropriate means. He does not sit idle by relying on Anupaya (destiny etc.). ॥ 51 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥