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mahabharat 3.209.36: वहाँ वह अनेक नए पाप करता है, जिसके कारण उसे कुभोजन करने वाले रोगी की तरह अनेक प्रकार के दुःख भोगने पड़ते हैं ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 3.209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.209.36 
तत: कर्म समादत्ते पुनरन्यं नवं बहु।
पच्यते तु पुनस्तेन भुक्त्वापथ्यमिवातुर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वह अनेक नए पाप करता है, जिसके कारण उसे कुभोजन करने वाले रोगी की तरह अनेक प्रकार के दुःख भोगने पड़ते हैं ॥36॥
 
There he commits many new sins, due to which, like a patient who has eaten bad food, he has to suffer many kinds of pain. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)