Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.209.32: शुभ कर्मों के संयोग से जीव देवत्व को प्राप्त होता है। शुभ और अशुभ दोनों के संयोग से वह मनुष्य योनि में जन्म लेता है। मोह उत्पन्न करने वाले तामसिक कर्मों के आचरण से जीव पशु, पक्षी आदि योनियों में जन्म लेता है और जिसने केवल पाप ही संचित कर रखे हैं, वह नरक में जाता है। 32॥ | mahabharat अध्याय 3.209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुभै: प्रयोगैर्देवत्वं व्यामिश्रैर्मानुषो भवेत्।
मोहनीयैर्वियोनीषु त्वधोगामी च किल्बिषी॥ ३२॥
अनुवाद
शुभ कर्मों के संयोग से जीव देवत्व को प्राप्त होता है। शुभ और अशुभ दोनों के संयोग से वह मनुष्य योनि में जन्म लेता है। मोह उत्पन्न करने वाले तामसिक कर्मों के आचरण से जीव पशु, पक्षी आदि योनियों में जन्म लेता है और जिसने केवल पाप ही संचित कर रखे हैं, वह नरक में जाता है। 32॥
By the combination of good deeds a living being attains divinity. Due to the mixture of both auspicious and inauspicious, he is born in human form. Due to the conduct of tamasic activities which lead to delusion, the living being takes birth in the form of animal, bird etc. and the one who has accumulated only sins goes to hell. 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥