| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन » श्लोक 29 |
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| | | | श्लोक 3.209.29  | ब्राह्मण उवाच
कथं सम्भवते योनौ कथं वा पुण्यपापयो:।
जाती: पुण्यास्त्वपुण्याश्च कथं गच्छति सत्तम॥ २९॥ | | | | | | अनुवाद | | ब्राह्मण ने पूछा - हे सत्पुरुषों में श्रेष्ठ ! जीव किस प्रकार दूसरे योनि में जन्म लेता है, उसका पाप और पुण्य से कैसा सम्बन्ध है तथा वह किस प्रकार पुण्य और पाप योनियों को प्राप्त होता है ? 29॥ | | | | The Brahmin asked – Best among good men! How does a living being take birth in another life, how is it related to sin and good deeds and how does it attain virtuous and sinful lives? 29॥ | | ✨ ai-generated | | |
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