श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.209.28 
सुपुण्यशीला हि भवन्ति पुण्या
नराधमा: पापकृतो भवन्ति।
नरोऽनुयातस्त्विह कर्मभि: स्वै-
स्तत: समुत्पद्यति भावितस्तै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्मा पुरुष पुण्य कर्म करते हैं और अधम पुरुष पाप करते हैं। यहाँ मनुष्य के कर्म उसके पीछे-पीछे चलते हैं और उन्हीं से प्रभावित होकर वह दूसरा जन्म लेता है॥28॥
 
Virtuous men perform pious deeds and vile men indulge in sins. Here the deeds performed by a man follow him and influenced by them he takes another birth.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)