अन्यो हि नाश्नाति कृतं हि कर्म
मनुष्यलोके मनुजस्य कश्चित्।
यत् तेन किंचिद्धि कृतं हि कर्म
तदश्नुते नास्ति कृतस्य नाश:॥ २७॥
अनुवाद
इस मानव-लोक में मनुष्य द्वारा किए गए कर्म का भोग (कर्ता के अतिरिक्त) कोई नहीं पाता। मनुष्य जो भी कर्म करता है, उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है। किए गए कर्म कभी नष्ट नहीं होते।
In this human world, no one (except the doer) enjoys the karma done by a man. Whatever karma he has done, he himself will have to suffer it. The karmas done are never destroyed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)