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mahabharat 3.209.23: विप्रवर! श्रुति के अनुसार यह आत्मा निश्चय ही नित्य है और इस संसार में सभी जीवों का शरीर नश्वर है॥23॥   |   mahabharat अध्याय 3.209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.209.23 
यथाश्रुतिरियं ब्रह्मन् जीव: किल सनातन:।
शरीरमध्रुवं लोके सर्वेषां प्राणिनामिह॥ २३॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! श्रुति के अनुसार यह आत्मा निश्चय ही नित्य है और इस संसार में सभी जीवों का शरीर नश्वर है॥23॥
 
Vipravara! According to Shruti, this soul is definitely eternal and the body of all living beings in this world is mortal. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)