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mahabharat 3.209.16-17h: हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ कौशिक! देखो, जिनके पास अन्न का पूरा भण्डार है, वे प्रायः पेचिश से पीड़ित रहते हैं और उसे ग्रहण नहीं कर पाते।॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 209: धर्मकी सूक्ष्मता, शुभाशुभ कर्म और उनके फल तथा ब्रह्मकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  3.209.16-17h 
येषामस्ति च भोक्तव्यं ग्रहणीदोषपीडिता:॥ १६॥
न शक्नुवन्ति ते भोक्तुं पश्य धर्मभृतां वर।
 
 
अनुवाद
हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ कौशिक! देखो, जिनके पास अन्न का पूरा भण्डार है, वे प्रायः पेचिश से पीड़ित रहते हैं और उसे ग्रहण नहीं कर पाते।॥16 1/2॥
 
O best of the virtuous Kaushika! See, those who have a full store of food are often troubled by dysentery and are unable to consume it. ॥ 16 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)