Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.208.7: द्विजश्रेष्ठ! क्षमाशील (और दयालु) उशीनर के पुत्र राजा शिबि ने भूखे बाज को कबूतर के बदले अपना शरीर का मांस अर्पित किया था और उस बलिदान से उन्हें दुर्लभतम स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.208.7 
आत्ममांसप्रसादेन शिबिरौशीनरो नृप:।
स्वर्गं सुदुर्गमं प्राप्त: क्षमावान् द्विजसत्तम॥ ७॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! क्षमाशील (और दयालु) उशीनर के पुत्र राजा शिबि ने भूखे बाज को कबूतर के बदले अपना शरीर का मांस अर्पित किया था और उस बलिदान से उन्हें दुर्लभतम स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी॥7॥
 
Dwijshreshtha! The forgiving (and kind) king Shibi, son of Ushinara, had offered his body's flesh (in exchange for a pigeon to a hungry hawk) and through his offering, he attained the rarest of heaven. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)